रात में पैरों में जलन से परेशान बुजुर्ग व्यक्ति

रात में पैरों में जलन क्यों होती है? 8 असली कारण, तुरंत राहत के उपाय और डॉक्टर को कब दिखाएं

चिकित्सकीय समीक्षा: Dr. Avinash Chandra Ranjan

⚠️ चिकित्सकीय अस्वीकरण (Medical Disclaimer): वरिष्ठ जीवन सूत्र पर दी गई सभी जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। अपने आहार, दवाओं या जीवनशैली में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या रीनल डायटीशियन से परामर्श लें।

दिनभर पैर बिल्कुल ठीक रहते हैं। फिर बिस्तर पर लेटते ही तलवों में जलन शुरू हो जाती है। बहुत से लोग इस तकलीफ को चुपचाप सहते रहते हैं, बिना यह समझे कि आखिर रात में ही ऐसा क्यों होता है।

सोने की कोशिश करते समय पैरों के तलवों में गर्मी, चुभन या जलन-सी महसूस होने लगती है। नींद टूटती है, करवटें बदलनी पड़ती हैं और कई बार राहत के लिए पैरों को बिस्तर या कंबल से बाहर निकालकर ठंडी हवा में रखना पड़ता है।

अगर आपके साथ या आपके परिवार में किसी बुजुर्ग के साथ ऐसा हो रहा है, तो पहली बात यह समझना जरूरी है — यह सिर्फ “उम्र का असर” या सामान्य थकान नहीं है। ज़्यादातर मामलों में यह नसों से जुड़ा एक संकेत होता है और अक्सर किसी दूसरी बीमारी का शुरुआती इशारा भी हो सकता है।

संक्षेप में जवाब: रात में पैरों में जलन होने का सबसे बड़ा कारण नसों को नुकसान पहुंचना है, जिसे डॉक्टरी भाषा में पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसके पीछे सबसे आम वजहें हैं — डायबिटीज, शरीर में विटामिन B12 की कमी, किडनी की बीमारी, थायराइड की गड़बड़ी और कभी-कभी पैर की किसी नस का दबना।

इस लेख में हम हर कारण को विस्तार से समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि रात में ही यह तकलीफ ज्यादा क्यों बढ़ती है, आज रात राहत के लिए क्या किया जा सकता है और किन स्थितियों में डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी हो जाता है।


Table of Contents

रात में पैरों में जलन ज्यादा क्यों बढ़ती है?

अगर नसों में कोई दिक्कत है, तो दिन में उतनी तकलीफ क्यों नहीं होती जितनी रात में होती है? इसके पीछे तीन वजहें मिलकर काम करती हैं।

पहली वजह — शरीर के हार्मोन का उतार-चढ़ाव।

हमारे शरीर में कॉर्टिसोल नाम का एक हार्मोन होता है, जो सूजन और दर्द को कुछ हद तक कम रखने में मदद करता है। रात के समय इसका स्तर अपने आप गिर जाता है, जबकि मेलाटोनिन यानी नींद वाला हार्मोन बढ़ता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस बदलाव से नसों की संवेदनशीलता रात में बढ़ जाती है, जिससे हल्की-सी गड़बड़ी भी ज्यादा तेज महसूस होती है।

यह विषय अभी भी शोध का हिस्सा है। वैज्ञानिक इसे पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। लेकिन डायबिटीज से जुड़ी नसों की तकलीफ पर शोधकर्ताओं ने यह पैटर्न बार-बार देखा है।

दूसरी वजह — दिन में ध्यान बंटा रहता है।

दिनभर आप काम, बातचीत, टीवी या घर के दूसरे कामों में व्यस्त रहते हैं। दिमाग का ध्यान कहीं और होने की वजह से हल्की जलन या झनझनाहट पर ध्यान नहीं जाता।

रात में स्थिति अलग होती है। कमरा शांत होता है, गतिविधियां कम हो जाती हैं और ध्यान शरीर की संवेदनाओं पर ज्यादा जाता है। इसलिए वही जलन जो दिन में हल्की लग रही थी, रात में कहीं ज्यादा साफ महसूस होने लगती है।

तीसरी वजह — कंबल की गर्मी और नसों की सूजन।

रात में कंबल या रजाई के नीचे पैर गर्म हो जाते हैं। जिन नसों में पहले से कुछ नुकसान हो चुका है, वे इस गर्माहट को सही तरीके से पहचान नहीं पातीं और इसे जलन के संकेत के रूप में दिमाग तक पहुंचा देती हैं।

यानी रात का समय लक्षण को ज्यादा उभारता है। असली बीमारी या कारण कुछ और होता है।


सामान्य थकान या नस की तकलीफ? पहले यह फर्क समझें

हर बार होने वाली जलन नसों की गंभीर समस्या नहीं होती। नीचे दी गई तालिका से एक अंदाज़ा मिल सकता है कि आपकी तकलीफ सामान्य थकान जैसी है या न्यूरोपैथी की तरफ इशारा कर रही है।

पक्का जवाब, हालांकि, डॉक्टर की जांच से ही मिलता है।

संकेतसामान्य थकाननस की तकलीफ (न्यूरोपैथी) की तरफ इशारा
कब होती हैदिनभर खड़े रहने/चलने के बादबिना खास मेहनत के भी, खासकर रात को
कितने समय रहती हैआराम करने पर कुछ घंटों में ठीकहफ्तों तक बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ती भी है
साथ में और क्या महसूस होता हैसिर्फ थकान या हल्का दर्दसुन्नपन, झनझनाहट, पैर का ठंडा या अलग-सा महसूस होना
कितनी बार होती हैकभी-कभी, मेहनत के बादलगभग हर रात

अगर आपकी जलन दाईं तरफ के कॉलम से ज्यादा मिलती है, तो नीचे दिए कारणों को ध्यान से पढ़ें और जांच की तरफ बढ़ें।


पेरिफेरल न्यूरोपैथी में नस से पैर तक नुकसान का चित्रण

पैरों में जलन के 8 मुख्य कारण — इनमें से कौन सा आप पर लागू होता है?

इनमें से ज़्यादातर कारणों की जड़ एक ही जगह मिलती है — नसों को नुकसान।

नसों में सबसे पहले वही पतले फाइबर प्रभावित होते हैं जो दर्द और तापमान का एहसास कराते हैं। इसी वजह से शुरुआत में नुकसान सीधे सुन्नपन के रूप में सामने नहीं आता। कई बार पहले जलन या गर्मी का झूठा एहसास होने लगता है।

असल में दिमाग तक नस से पहुंचने वाला सिग्नल गड़बड़ा जाता है।

अब उन आठ कारणों को समझते हैं जिनकी वजह से यह नुकसान शुरू हो सकता है।

1. डायबिटीज और डायबिटिक न्यूरोपैथी — सबसे आम वजह

अगर किसी एक कारण को सबसे ज्यादा जिम्मेदार ठहराना हो, तो वह है लंबे समय से बढ़ा हुआ ब्लड शुगर।

जब शुगर लंबे समय तक ज्यादा रहता है, तो यह पैरों तक जाने वाली छोटी नसों और उन्हें पोषण देने वाली रक्त वाहिकाओं, दोनों को नुकसान पहुंचाता है। इसी को डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है।

इसका सबसे पहला और सबसे आम लक्षण अक्सर पैरों में जलन या झनझनाहट ही होता है — और यह तकलीफ रात में ज्यादा महसूस होती है।

अमेरिका के NIDDK यानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, डायबिटीज से पीड़ित लगभग एक-तिहाई से आधे लोगों में यह समस्या पाई जाती है।

भारत में यह आंकड़ा और भी गंभीर है।

2023 में प्रकाशित ICMR-INDIAB अध्ययन अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रीय अध्ययन है। इसमें 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एक लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। इसके मुताबिक भारत में डायबिटीज की दर 11.4% है, यानी 10 करोड़ से ज्यादा लोग इससे जूझ रहे हैं।

इसका सीधा मतलब है कि अगर आपके पैरों में रात को जलन होती है और आपको डायबिटीज है — या आपको यह पता ही नहीं है कि डायबिटीज है या नहीं — तो इसकी जांच सबसे पहले किए जाने वाले कामों में से एक होनी चाहिए।

एक अहम बात और है।

कई बार लोगों को डायबिटीज होने का पता ही नहीं होता। पैरों की जलन पहला ऐसा संकेत बनती है जो उन्हें जांच कराने पर मजबूर करती है।

सामान्यतः 6.5% या उससे अधिक HbA1c को डायबिटीज माना जाता है, जबकि 5.7% से 6.4% के बीच का स्तर प्री-डायबिटीज दर्शाता है। यह सीमा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है, लेकिन सटीक व्याख्या हमेशा डॉक्टर से ही करवानी चाहिए।

2. शरीर में विटामिन B12 की कमी

विटामिन B12 सीधे तौर पर नसों की सेहत से जुड़ा है।

इसकी कमी होने पर नसों के बाहर मौजूद सुरक्षा परत, जिसे माइलिन शीथ कहा जाता है, कमजोर पड़ने लगती है। इससे जलन, सुन्नपन और झनझनाहट होने लगती है।

भारत में यह समस्या जितनी आम है, उतनी शायद ही कहीं और हो।

B12 सिर्फ मांसाहारी भोजन — मांस, अंडा, मछली, दूध-दही — में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। पौधों से मिलने वाले भोजन में यह लगभग नहीं होता। चूंकि भारत में शाकाहार का चलन बहुत ज्यादा है, इसलिए इसकी कमी भी उतनी ही व्यापक है।

भारतीय वयस्कों और बुजुर्गों पर हुए अध्ययनों की एक समीक्षा बताती है कि माप के तरीके के अनुसार वयस्कों में यह कमी 78.5% तक और बुजुर्गों में 61.7% तक पाई गई।

एक अलग बड़े विश्लेषण में बुजुर्गों में यह आंकड़ा करीब 52% निकला।

दोनों अध्ययनों के आंकड़ों में फर्क इसलिए है क्योंकि उन्होंने कमी नापने के लिए अलग-अलग पैमाने इस्तेमाल किए। लेकिन दोनों एक बात पर सहमत हैं — भारत में बुजुर्गों में B12 की कमी कोई अपवाद नहीं, बल्कि आम बात है।

अगर आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति सालों से शुद्ध शाकाहारी है, खासकर 60 की उम्र के बाद, तो B12 की जांच करवाना एक बहुत सस्ता और आसान कदम है जो महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है।

3. मेटफॉर्मिन (डायबिटीज की दवा) — एक ऐसा कारण जिसकी बात कम होती है

अगर आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति डायबिटीज के लिए मेटफॉर्मिन लेता है, तो इस हिस्से पर खास ध्यान दें। भारत में डायबिटीज के इलाज में यह सबसे आम और शुरुआती दवाओं में से एक है।

लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने से शरीर की विटामिन B12 सोखने की क्षमता कम हो जाती है।

यह कोई अटकल नहीं, बल्कि ठोस शोध पर आधारित तथ्य है। अमेरिकी डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) की गाइडलाइन में साफ लिखा है कि मेटफॉर्मिन लेने वाले मरीजों की B12 जांच नियमित रूप से करवानी चाहिए।

भारत में हुए अध्ययनों में पाया गया कि लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने वाले करीब 30% मरीजों में B12 सोखने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।

एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि नसों से जुड़ी तकलीफ यानी न्यूरोपैथी वाले मरीजों में से 64% में B12 का स्तर कम या सीमारेखा पर था। बिना न्यूरोपैथी वाले मरीजों में यह आंकड़ा सिर्फ 17% था।

इसका मतलब क्या है?

अगर आप सालों से डायबिटीज के लिए मेटफॉर्मिन ले रहे हैं और अब पैरों में जलन महसूस कर रहे हैं, तो हो सकता है कि यह जलन सिर्फ डायबिटीज की वजह से नहीं, बल्कि दवा की वजह से हुई B12 की कमी के कारण भी हो — या दोनों कारण मिलकर काम कर रहे हों।

यह एक ऐसा कारण है जिसे ठीक करना अपेक्षाकृत आसान है। B12 सप्लीमेंट या इंजेक्शन से इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन परेशानी यह है कि कई बार इसकी जांच ही नहीं होती।

आज ही करें: अगर आप कई साल से मेटफॉर्मिन ले रहे हैं, तो अपनी अगली डॉक्टर विज़िट पर सीधे पूछें — “क्या मेरा B12 लेवल एक बार चेक हो सकता है?”

4. किडनी की बीमारी — यूरेमिक न्यूरोपैथी

जब किडनी ठीक से काम करना बंद कर देती है, तो शरीर के विषैले पदार्थ यानी टॉक्सिन्स खून में जमा होने लगते हैं। ये धीरे-धीरे नसों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

इसे यूरेमिक न्यूरोपैथी कहा जाता है और पैरों में जलन इसका एक बहुत सामान्य लक्षण है।

भारत के अलग-अलग अस्पतालों में हुए अध्ययनों में यह संबंध बार-बार सामने आया है।

दक्षिण भारत के एक अध्ययन में किडनी की बीमारी वाले आधे मरीजों में लक्षणों के आधार पर नस की गड़बड़ी पाई गई। नर्व कंडक्शन टेस्ट के आधार पर देखें, तो यह आंकड़ा करीब 89% तक पहुंच गया। डायलिसिस पर मौजूद मरीजों में यह समस्या और भी ज्यादा पाई गई।

यह बात ध्यान में रखना जरूरी है कि ये अध्ययन खास अस्पतालों के मरीजों पर हुए हैं। इसलिए इन आंकड़ों को पूरे देश का औसत नहीं माना जाना चाहिए।

लेकिन दिशा साफ है — किडनी और पैरों की जलन का रिश्ता वास्तविक है।

अगर पैरों की जलन के साथ पैरों या चेहरे पर सूजन, बार-बार थकान या पेशाब में बदलाव भी दिख रहा हो, तो किडनी फंक्शन टेस्ट — क्रिएटिनिन और eGFR — जरूर करवाएं।

5. थायराइड की गड़बड़ी

अंडरएक्टिव थायराइड यानी हाइपोथायरायडिज्म भी नसों पर असर डाल सकता है और पैरों में जलन की वजह बन सकता है।

अच्छी बात यह है कि थायराइड हार्मोन की सही खुराक शुरू करने पर यह समस्या अक्सर अपने आप सुधरने लगती है।

अगर जलन के साथ-साथ ठंड ज्यादा लगना, वजन बढ़ना या बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, तो थायराइड टेस्ट यानी TSH करवाना उचित रहेगा।

6. टार्सल टनल सिंड्रोम — नस का दबना

टार्सल टनल सिंड्रोम उस स्थिति में होता है जब टखने के पास मौजूद एक नस, जिसे टिबियल नर्व कहा जाता है, किसी वजह से दब जाती है।

इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह अक्सर सिर्फ एक पैर में होता है, दोनों में नहीं।

इसके उलट डायबिटीज, B12 की कमी या किडनी से जुड़ी जलन आमतौर पर दोनों पैरों में एक साथ होती है।

अगर आपकी जलन सिर्फ एक तरफ है, तो यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। डॉक्टर को इसके बारे में जरूर बताएं।

7. शराब का लंबे समय तक सेवन

ज्यादा और लंबे समय तक शराब पीने से भी नसों को सीधा नुकसान पहुंचता है।

इसके साथ शरीर में थायमिन जैसे पोषक तत्वों की कमी भी हो जाती है, जो नसों की सेहत के लिए ज़रूरी हैं।

शराब छोड़ने और पोषण सुधारने से इस तरह की न्यूरोपैथी में सुधार देखा गया है।

लेकिन अगर कोई व्यक्ति रोज़ बहुत ज्यादा शराब पीता है, तो अचानक अपने आप शराब बंद करना कुछ मामलों में खतरनाक हो सकता है। गंभीर शराब निर्भरता में विदड्रॉअल के कारण दौरे या दूसरी जटिलताएं हो सकती हैं। ऐसे व्यक्ति को डॉक्टर की निगरानी में योजना बनानी चाहिए।

8. अन्य कम सामान्य कारण

कुछ और वजहें भी हैं जो कम मिलती हैं, लेकिन उन्हें जानना जरूरी है।

इनमें सबसे आम है पैरों में फंगल इन्फेक्शन, जिसे एथलीट फुट कहा जाता है।

यह ऊपर बताए गए बाकी कारणों से अलग है, क्योंकि इसमें जलन के साथ खुजली भी होती है। यह अक्सर पंजों के बीच की त्वचा से शुरू होता है और दोनों तलवों में एक साथ नहीं फैलता।

यह आसानी से इलाज होने वाली स्थिति है। एंटीफंगल क्रीम से आमतौर पर कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती है।

इसके अलावा कुछ दवाइयों, जैसे कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टैटिन दवाइयों, का साइड इफेक्ट भी जिम्मेदार हो सकता है। बहुत कम मामलों में कीमोथेरेपी या कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसका कारण बनती हैं।

अगर किसी नई दवा को शुरू करने के बाद पैरों में झनझनाहट या जलन शुरू हुई है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। दवा अपने आप बंद न करें।

अब तक आपने आठ संभावित कारण पढ़ लिए हैं। नीचे की तालिका से यह समझना थोड़ा आसान होगा कि कौन-सा कारण किस तरह के लक्षणों के साथ ज्यादा मेल खाता है।


एक नज़र में — कौन सा कारण आपके लक्षणों से सबसे ज्यादा मेल खाता है?

कारणखास पहचान का संकेतएक पैर या दोनोंकितना सामान्य
डायबिटीजधीरे-धीरे बढ़ी जलन, पैर सुन्न होनादोनों पैरसबसे आम
विटामिन B12 की कमीथकान, चक्कर, याददाश्त में कमी साथ मेंदोनों पैरआम
मेटफॉर्मिन से B12 की कमीलंबे समय से दवा ले रहे डायबिटीज मरीजदोनों पैरआम, पर अनदेखा
किडनी की बीमारीसूजन, कम पेशाब, थकान साथ मेंदोनों पैरकम आम
थायराइडठंड ज्यादा लगना, वजन बढ़नादोनों पैरकम आम
टार्सल टनल सिंड्रोमअचानक, तेज, एक तरफएक पैरकम आम

किन लोगों को ज्यादा खतरा है?

पैरों की जलन और न्यूरोपैथी का खतरा इन लोगों में ज्यादा रहता है:

  • 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग
  • कई साल से डायबिटीज के मरीज, खासकर वे जो मेटफॉर्मिन ले रहे हैं
  • शुद्ध शाकाहारी, खासकर बुजुर्ग
  • B12 की कमी के जोखिम वाले लोग
  • किडनी की किसी भी स्तर की बीमारी वाले लोग
  • शराब का नियमित सेवन करने वाले लोग
  • पहले से न्यूरोपैथी या पैरों में सुन्नपन वाले लोग

अगर इनमें से एक भी बात आप पर लागू होती है, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय जांच करवाने की तरफ बढ़ना बेहतर है।


डॉक्टर से कौन-सी जांच करवाएं?

अगली बार डॉक्टर के पास जाएं, तो इन जांचों के बारे में पूछें। इनसे कारण जल्दी पकड़ने में मदद मिलती है:

  1. फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c — डायबिटीज या प्री-डायबिटीज पता लगाने के लिए
  2. सीरम विटामिन B12 — खासकर अगर आप शाकाहारी हैं या मेटफॉर्मिन लेते हैं
  3. किडनी फंक्शन टेस्ट (क्रिएटिनिन, eGFR) — किडनी की सेहत जांचने के लिए
  4. थायराइड टेस्ट (TSH) — अगर ठंड लगना या थकान जैसे लक्षण भी हों
  5. नर्व कंडक्शन स्टडी — अगर ऊपर की जांचें सामान्य आएं, फिर भी लक्षण बने रहें, तो यह नसों की ज्यादा गहराई से जांच करती है

डॉक्टर से बात करने का एक व्यावहारिक तरीका है कि सीधे कहें:

“मुझे रात में पैरों में जलन होती है — क्या आप मेरा शुगर, B12 और किडनी फंक्शन एक साथ चेक कर सकते हैं?”

इससे एक ही विज़िट में तीन सबसे संभावित कारणों की जांच शुरू हो जाती है और बार-बार क्लीनिक जाने से बचा जा सकता है।

जांच के नतीजे आने में कुछ दिन लग सकते हैं। तब तक आज रात राहत के लिए क्या किया जा सकता है?


ठंडे पानी में पैर डुबोकर जलन से तुरंत राहत

आज रात तुरंत राहत के लिए क्या करें?

जब तक असली कारण का पता चलकर सही इलाज शुरू नहीं होता, तब तक ये कदम राहत दे सकते हैं:

ठंडे पानी में पैर डुबोएं — लेकिन बर्फ-ठंडा नहीं।

सोने से पहले 15–20 मिनट के लिए सामान्य ठंडे पानी में पैर डुबोना जलन को अस्थायी रूप से कम कर सकता है।

⚠️ सावधानी: अगर आपको डायबिटीज है और नसों में पहले से नुकसान हो चुका है, तो पैर बर्फ जैसे ठंडे पानी में बिल्कुल न डालें। सुन्नपन के कारण आपको पता नहीं चलेगा कि पानी कितना ठंडा है। इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है और उसका एहसास तुरंत नहीं होगा।

कमरा ठंडा रखें, हल्के कपड़े पहनें।

सूती मोज़े दिन में ठीक हैं, लेकिन रात में सोते समय पैरों को खुला रखना या हल्की चादर इस्तेमाल करना बेहतर है, ताकि गर्माहट न बढ़े।

पैर कंबल के बाहर रखें।

अगर मुमकिन हो, तो कंबल के नीचे से पैर बाहर निकालकर सोएं। इससे नसों पर गर्मी का असर कम हो जाता है।

हल्की मालिश करें।

पैरों की हल्के हाथों से मालिश रक्त संचार बढ़ाने में मदद करती है और आराम भी देती है। यह ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है।

ये चार कदम फौरी राहत के लिए हैं। लेकिन इंटरनेट पर इसके अलावा भी कई “जादुई” घरेलू उपायों के दावे मिलते हैं। इनमें से हर उपाय के पीछे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।


घरेलू उपाय — क्या सच में असर करता है?

पैरों की जलन के घरेलू इलाज को लेकर इंटरनेट पर बहुत कुछ लिखा मिलता है, लेकिन हर दावे के पीछे बराबर मजबूत सबूत नहीं हैं।

इसलिए नीचे हर उपाय के साथ यह साफ किया गया है कि उसके पीछे ठोस शोध है या मुख्य रूप से पारंपरिक इस्तेमाल — ताकि आप समझ सकें कि किस बात पर कितना भरोसा करना है।

फायदे और सीमाएं — एक नज़र में

फायदेसीमाएं
सस्ते और घर पर आसानी से किए जा सकते हैंअसली बीमारी — डायबिटीज, B12 की कमी, किडनी — को ठीक नहीं करते
ज़्यादातर सुरक्षित, कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहींराहत सिर्फ अस्थायी होती है
तुरंत कुछ राहत मिल सकती हैकुछ उपायों, जैसे हल्दी मालिश, पर सीधा वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है

अल्फा-लिपोइक एसिड (सप्लीमेंट): कई मरीज इसे नर्व पेन के लिए इस्तेमाल करते हैं। शोध के नतीजे मिले-जुले हैं। कुछ अध्ययनों में सुधार दिखा, जबकि कुछ में नहीं।

नस में यानी IV के जरिए दी जाने वाली खुराक पर ज्यादा भरोसेमंद असर देखा गया है, जबकि गोली के रूप में लेने पर असर उतना साफ नहीं है। इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

हल्दी या करक्यूमिन की मालिश: इसका इस्तेमाल परंपरागत रूप से होता रहा है और हल्दी में सूजनरोधी गुण जरूर हैं। लेकिन खासतौर पर पैरों की जलन कम करने पर इसका सीधा वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित है।

यह नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे “पक्का इलाज” मान लेना ठीक नहीं।

टॉपिकल क्रीम — कैप्साइसिन या लिडोकेन युक्त: कुछ मरीजों को इनसे आराम मिलता है। इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से पूछ लें, खासकर अगर त्वचा पहले से संवेदनशील है।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि घरेलू उपाय लक्षण को कुछ समय के लिए कम कर सकते हैं। अगर असली कारण डायबिटीज, B12 की कमी या किडनी की बीमारी है और उसका इलाज नहीं होता, तो जलन लौटती रहेगी।


डॉक्टर को कब तुरंत दिखाएं?

नीचे दिए गए किसी भी संकेत पर केवल घरेलू उपायों के भरोसे न बैठें। डॉक्टर से मिलें अगर:

☐ जलन अचानक और तेज़ी से शुरू हुई हो
☐ पैर में कोई घाव या ज़ख्म है जो ठीक नहीं हो रहा — खासकर अगर आपको डायबिटीज है
☐ कई हफ्तों तक घरेलू देखभाल के बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ा
☐ जलन धीरे-धीरे और तेज़ होती जा रही है
☐ साथ में सूजन, कमजोरी या चलने में दिक्कत भी है
☐ पैर का रंग बदल रहा है या पैर असामान्य रूप से ठंडा महसूस हो रहा है

इनमें से एक भी बात लागू होती है, तो टालें नहीं — अगली उपलब्ध अपॉइंटमेंट लें।

अगर समस्या अचानक बहुत गंभीर हो, चलना मुश्किल हो जाए या कोई नया गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दे, तो नियमित अपॉइंटमेंट का इंतजार करने के बजाय जल्दी चिकित्सा सहायता लें।


लोग अक्सर ये गलतियां करते हैं

1. इसे सिर्फ “उम्र का असर” मानकर टाल देना

पैरों की लगातार जलन को केवल बढ़ती उम्र का हिस्सा समझ लेना सही नहीं है। यह अक्सर किसी इलाज-योग्य कारण का संकेत होता है।

2. बर्फ जैसे ठंडे पानी का इस्तेमाल करना

अगर नसों में सुन्नपन है, तो बहुत ठंडे पानी से उल्टा नुकसान हो सकता है। त्वचा को चोट लग सकती है और उसका एहसास भी समय पर नहीं होगा।

3. मेटफॉर्मिन लेने के बावजूद कभी B12 टेस्ट न करवाना

लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने वालों में B12 की कमी आसानी से छूट सकती है। पैरों में जलन शुरू होने पर इसकी जांच करवाना महत्वपूर्ण है।

4. सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना

मालिश, ठंडा पानी या दूसरे घरेलू उपाय कुछ समय राहत दे सकते हैं। लेकिन अगर कारण किडनी या थायराइड जैसी गंभीर समस्या है, तो इन उपायों से असली बीमारी ठीक नहीं होती।

5. एक पैर की जलन को दोनों पैरों की जलन जैसा ही समझना

सिर्फ एक पैर में होने वाली जलन और दोनों पैरों में होने वाली जलन की वजहें अलग हो सकती हैं। यह फर्क डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए।


भविष्य में बचाव कैसे करें?

  • ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाते रहें, भले ही डायबिटीज न हो
  • अगर शाकाहारी हैं, तो साल में एक बार B12 का स्तर जरूर जंचवाएं
  • अगर डायबिटीज या ब्लड प्रेशर है, तो साल में एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट करवाएं
  • रोज़ पैरों को देखें — खासकर डायबिटीज होने पर तलवे, एड़ी और पंजों के बीच की त्वचा में कट, छाला, लालिमा या फंगल इन्फेक्शन तो नहीं, यह जांचना उपयोगी है।
  • नंगे पांव चलने से बचें, खासकर अगर नसों में पहले से हल्की सुन्नता महसूस हो चुकी है — क्योंकि तब चोट का पता देर से चलता है
  • खानपान में संतुलन बनाए रखें ताकि शुगर और वजन दोनों काबू में रहें

मुख्य बातें एक नज़र में

  • रात में जलन बढ़ने की वजह हार्मोन बदलाव, ध्यान न बंटना और कंबल की गर्माहट — तीनों मिलकर हैं
  • सबसे आम कारण: डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी, किडनी की बीमारी, थायराइड
  • मेटफॉर्मिन लेने वालों को B12 की जांच ज़रूर करवानी चाहिए — यह अक्सर छूट जाता है
  • B12 की कमी और पहले से मौजूद नसों की समस्या भी जोखिम बढ़ाते हैं
  • एक पैर में जलन और दोनों पैरों में जलन का फर्क डॉक्टर को बताना ज़रूरी है
  • घरेलू उपाय अस्थायी राहत देते हैं, असली इलाज नहीं
  • बहुत ठंडा पानी या बर्फ खासकर सुन्न पैरों में नुकसान पहुंचा सकता है
  • घाव या अचानक शुरू हुई तेज जलन पर डॉक्टर से मिलना न टालें
  • हफ्तों तक बनी रहने वाली या लगातार बढ़ती जलन की जांच करवानी चाहिए

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पैरों में जलन किस विटामिन की कमी से होती है?

सबसे ज्यादा जुड़ाव विटामिन B12 की कमी से पाया जाता है। B6 और फोलिक एसिड की कमी भी कभी-कभी इसमें भूमिका निभा सकती है।

पैरों में जलन हो रही है तो क्या करना चाहिए?

पहले देखें कि जलन हल्की है या तेज़ और एक पैर में है या दोनों में। अस्थायी राहत के लिए ठंडे — लेकिन बर्फ जैसे ठंडे नहीं — पानी में पैर डुबोएं। अगर जलन कई हफ्तों से बनी हुई है, तो डॉक्टर से ब्लड शुगर, B12 और किडनी की जांच करवाएं।

रात को सोते समय पैरों में जलन क्यों होती है?

रात में कॉर्टिसोल का स्तर गिरता है, दिन जैसा ध्यान नहीं बंटता और कंबल की गर्माहट पहले से कमजोर नसों को छेड़ देती है। इसी वजह से जो जलन दिन में हल्की लगती है, वह रात में कहीं ज्यादा साफ महसूस होती है।

पैर जलने का घरेलू उपाय क्या है?

सामान्य ठंडे — बर्फ जैसे ठंडे नहीं — पानी में पैर डुबोना, हल्की मालिश करना और कंबल के बाहर पैर रखना तुरंत राहत में मदद कर सकता है। लेकिन असली कारण का इलाज होना कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।

क्या किडनी खराब होने पर पैरों में जलन होती है?

हां। किडनी की बीमारी बढ़ने पर शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं जो नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे जलन हो सकती है। इसे यूरेमिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।

हाथ-पैरों में जलन क्यों होती है?

जब कारण डायबिटीज, B12 की कमी या किडनी से जुड़ा हो, तो कई बार जलन सिर्फ पैरों तक सीमित नहीं रहती और हाथों तक भी फैल सकती है, क्योंकि यह पूरे शरीर की नसों को प्रभावित करने वाली समस्या है।

पैरों में जलन के लिए कौन सा टेस्ट कराएं?

शुरुआत में फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c, सीरम B12 और किडनी फंक्शन टेस्ट यानी क्रिएटिनिन करवाना सबसे उपयोगी होता है। अगर इनमें कुछ स्पष्ट न आए, तो डॉक्टर नर्व कंडक्शन स्टडी की सलाह दे सकते हैं।

क्या मेटफॉर्मिन से पैरों में जलन हो सकती है?

सीधे तौर पर मेटफॉर्मिन जलन पैदा नहीं करता। लेकिन लंबे समय तक इसे लेने से शरीर में विटामिन B12 की कमी हो सकती है, और यही कमी नसों को प्रभावित करके जलन का कारण बन सकती है।
इसीलिए मेटफॉर्मिन लेने वालों को नियमित B12 जांच की सलाह दी जाती है।


निष्कर्ष

रात में पैरों की जलन कोई मामूली बात नहीं, बल्कि शरीर का एक संकेत है। अच्छी बात यह है कि इसके ज़्यादातर कारण पहचाने जा सकते हैं और इलाज योग्य हैं।

रात में यह तकलीफ इसलिए बढ़ती है क्योंकि हार्मोन का स्तर बदलता है, ध्यान बंटना कम हो जाता है और कंबल की गर्माहट नसों को छेड़ देती है। लेकिन असली वजह अक्सर डायबिटीज, B12 की कमी — खासकर मेटफॉर्मिन लेने वालों में — किडनी की समस्या या थायराइड में छुपी होती है।

आज रात के लिए सामान्य ठंडे पानी में पैर डुबोएं, कंबल के बाहर रखें और हल्की मालिश करें।

लेकिन अगर यह तकलीफ दो-तीन हफ्तों से ज्यादा बनी हुई है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। ब्लड शुगर, B12 और किडनी की जांच करवाना सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम है।

सही जांच और समय पर इलाज से यह समस्या पूरी तरह से नियंत्रण में आ सकती है।

आपको बस पहला कदम उठाना है — अगली डॉक्टर विज़िट पर वे तीन जांच पूछना जो इस लेख में बताई गई हैं। बाकी रास्ता सही जांच और समय पर इलाज खुद दिखा देंगे।

स्रोत

कोर तंत्र और सामान्य कारण

Cleveland Clinic — Burning Feet Syndrome
https://my.clevelandclinic.org/health/symptoms/17773-burning-feet-syndrome

Cleveland Clinic — Peripheral Neuropathy
https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/14737-peripheral-neuropathy

NHS — Peripheral Neuropathy: Causes
https://www.nhs.uk/conditions/peripheral-neuropathy/causes/

Mayo Clinic — Burning Feet, Causes
https://www.mayoclinic.org/symptoms/burning-feet/basics/causes/sym-20050809

डायबिटीज और डायबिटिक न्यूरोपैथी

NIDDK/NIH — Peripheral Neuropathy
https://www.niddk.nih.gov/health-information/diabetes/overview/preventing-problems/nerve-damage-diabetic-neuropathies/peripheral-neuropathy

Cleveland Clinic — Diabetes-Related Neuropathy
https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/21621-diabetic-neuropathy

PubMed — ICMR-INDIAB-17 (Lancet Diabetes & Endocrinology, 2023)
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/37301218/

मेटफॉर्मिन और B12

American Diabetes Association — Standards of Care in Diabetes 2026, Section 3
https://diabetesjournals.org/care/article/49/Supplement_1/S50/163924/3-Prevention-or-Delay-of-Diabetes-and-Associated

जांच

NHS — Peripheral Neuropathy: Diagnosis
https://www.nhs.uk/conditions/peripheral-neuropathy/diagnosis/

🩺 लेखक और चिकित्सकीय समीक्षा टीम (Editorial & Review Team)

इस स्वास्थ्य लेख की नैदानिक सटीकता की जांच डॉ. रंजन द्वारा की गई है। वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार में कार्यरत पूर्णकालिक चिकित्सा अधिकारी हैं और बिहार मेडिकल काउंसिल (पंजीकरण क्रमांक: 54662) के तहत पंजीकृत हैं। उनके पूर्ण क्रेडेंशियल्स की आधिकारिक पुष्टि के लिए हमारा चिकित्सकीय समीक्षक पृष्ठ देखें।

चिकित्सकीय अस्वीकरण (Medical Disclaimer): वरिष्ठ जीवन सूत्र पर दी गई सभी जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। अपने आहार, दवाओं या जीवनशैली में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या रीनल डायटीशियन से परामर्श लें।

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